Saturday, May 3, 2014


फलसफा -ए-ज़िंदगी

कदम का उठना,
गिरना,
और आगे बढ़ जाना-
इतनी सी है ज़िंदगी।

यारों का मिलना,
रूठना,
और हमेशा के लिये दूर हो जाना-
एक विरह सी है ज़िंदगी।

अश्क़ का छलकना, 
ढकलना, 
और गाल पर कहीं सूख जाना-
पल भर की है ज़िंदगी।

एहसासों का बन्धन,
उलझन,
और उम्मीदों का दलदल-
ऐसी ही है ज़िंदगी।
बस ऐसी ही है ज़िंदगी।.…… 











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